अतीत का क़ैदी
Image By @NibSamvaad
आज, दस साल बाद, उसने फिर से डायरी खोली अपने अतीत में झांकने के लिए, तन्हाइयों को दूर करने के लिए और उस लड़की की मौजूदगी को वापस जीने करने के लिए जिसने कभी उसकी खुशियों की वज़ह थी। जिसके संग वह हँसा था, रोया था, और खुलकर से जिंदगी का एक हिस्सा जिया था।
अद्वैत ने डायरी खोला और पहले पन्ने पर लिखा था—
"17 अक्टूबर, 2014 – आज पहली बार उससे मिला और उसकी आँखों की मासूमियत और चंचलता में मैं खो गया। जब वो मेरा नाम लेकर मुस्कुराई थी, तब लगा कि ये लम्हा कभी नहीं जाए।"
अद्वैत मुस्कुराया, लेकिन फिर अगले पन्ने पर उसकी मुस्कान फीकी पड़ गई—
"25 मार्च, 2017 – उसने कहा, 'हम अब वैसे नहीं रहे, अद्वैत… कुछ चीज़ें हमेशा के लिए नहीं होतीं। हमें अलग हो जाना चाहिए।' मैं जानता था कि यह सच है, लेकिन इस इसे कबूल नहीं करना चाहता था।"
अद्वैत डायरी के हर पन्ने को तेज़ी से पलटता चला गया। हर तारीख़ के साथ उसकी धड़कनें तेज़ होती गईं। वह हर लफ्ज़ को फिर से जी रहा था—पहली मुलाकात, पहली बहस, पहली जुदाई। अतीत ने जैसे उसे जकड़ लिया था।
तभी, खिड़की से आते हवा के झोंके ने कुछ सूखे और ताज़े हरे पत्ते अंदर गिरा दिए। ऐसा लगा जैसे वो अद्वैत को अतीत से वर्तमान में लाने की कोशिश कर रही हों।
अद्वैत अचानक ही अतीत की गिरफ्त से वापस होश में आया और खिड़की बंद करने को बढ़ा। वह खिड़की से बाहर पेड़ो के पत्तों को गौर से देखने लगा। जमीं पर गिरे सूखे और पेड़ों पर लहरा रही नई पत्तियां, अद्वैत से कुछ कह रही थीं : “पुराने पत्ते गिरते हैं, लेकिन उनकी जगह नई पत्तियाँ उगती हैं। पेड़ अतीत के पत्तों को गिरने देता है, और वर्तमान की नई पत्तियों का स्वागत करता है। पेड़ अपनी जड़ों को नहीं छोड़ता इसलिए पुरानी पत्तियां भी माटी में विलीन होकर पुनः उसे पोषित करती रहती है। और इस प्रकार पेड़ पुरानी और नई पत्तियों के तालमेल के साथ अपने जीवन यात्रा में आगे बढ़ता रहता है ।”
अद्वैत ने ध्यान से पेड़ को देखा और फिर उसे समझ आया कि - “हमें भी जीवन यात्रा में आगे बढ़ते रहना चाहिए। इस यात्रा में लोग जुड़ेंगे, बिछड़ेंगे। लेकिन इससे मायूस नहीं होना और नाही स्वयं को अतीत के पिंजरे में क़ैद कर लेना है। हमें अपने अतीत को साथ रखना है, उससे सीखने के लिए, मुस्कुराने की लिए, और अपनी जीवन यात्रा को मुड़कर देखने के लिए ‘आज हम कहाँ तक पहुंचे हैं।”
अतीत से आज़ादी की इस सीख के साथ, अद्वैत ने डायरी बंद कर दी। उसने फैसला किया—अतीत को भूलना नहीं है, बल्कि उसे साथ लेकर जीना है। यादें मिटाने के लिए नहीं, समझने के लिए होती हैं। वह कमरे से बाहर निकला, गहरी सांस ली, और पहली बार उसे लगा कि आज उसने सच में अतीत का असली अर्थ समझा है।
Shweta Prasad 🖊️
Comments
Post a Comment