जीवन की सीख
जतिन खुशी-खुशी गाँव में गया और लोगों से अपनी तारीफ़ करवाने लगा। लोग उसके सामने उसकी सिर्फ़ झूठी तारीफ़ करने लगे, यह सब सुनकर वह संतुष्ट होकर लौट आया।
आदित्य भी गाँव वालों के पास गया, लेकिन उसने कहा, "मुझे मेरी कमियाँ बताइए ताकि मैं बेहतर बन सकूँ।" पहले तो लोग झिझके, पर फिर उन्होंने ईमानदारी से उसकी गलतियाँ बताईं। आदित्य ने हर बात को ध्यान से सुना और मुस्कुराकर उनका धन्यवाद किया।
जब दोनों ने शिक्षक के पास पहुँचे तब जतिन ने अपनी सिर्फ़ तारीफें बताई जबकि आदित्य ने अपनी कमियों को बताया और स्वयं को सुधारने का वादा भी किया।
यह सब सुनकर शिक्षक ने मुस्कुराते हुए कहा, "जतिन, तुम साधारण हो क्योंकि तुम तारीफ़ पसंद करते हो। लेकिन आदित्य, तुम असाधारण हो क्योंकि तुम अपनी कमियाँ सुनकर सुधारना और सीखना चाहते हो। सच्ची महानता सुधार में है, प्रशंसा में नहीं।”
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✨ Story by Shweta Prasad 🖊️
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